top of page
अव्यक्त
जीवन के एहसास


आने वाला पल जाने वाला है
यथार्थ से भरपूर सुंदर क्षणों का स्वाद अक्सर देर से आता है। जब वे हमारे पास होते हैं, हम उनमें बस बहते रहते हैं। जब वे गुज़र जाते हैं, तब स्मृति उन्हें धीरे-धीरे खोलती है — ठीक वैसे जैसे गाय जुगाली करते समय घास का पूरा रस चुपचाप महसूस करती है। शायद इसलिए अकेलापन कभी-कभी सौंदर्य को समझने का सबसे शांत स्थान बन जाता है। यादें भी कुछ ऐसी ही होती हैं। गुज़रा हुआ समय इसीलिए इतना अद्भुत लगता है। पर अगर हम समय लांघकर उस दौर में खड़े होकर अपने उस वक्त के स्वरूप को देखें, तो पता चलेगा क
Vivek
5 days ago2 min read


एक अनुमान, एक एहसास
कुछ लोगों से बातें करके, उनसे मिलकर, हमारे भीतर बहुत कुछ बदल जाता है। कुछ बुरी आदतें छूट जाती हैं, और कुछ अच्छी बातें फिर से याद आ जाती हैं। इंसान के होने या न होने से, मिलने या न मिलने से, उसे देखने या न देखने से भी बहुत कुछ बदलता है हमारे भीतर। शायद इसलिए कि कुछ लोग हमारे जीवन में घटना की तरह नहीं, प्रभाव की तरह आते हैं। यह सब लिखते-लिखते मुझे किशोर कुमार का एक गीत याद आ गया— "आते-जाते खूबसूरत आवारा सड़कों पे कभी-कभी इत्तेफ़ाक़ से, कितने हसीन लोग मिल जाते हैं... उनमें से कु
Vivek
5 days ago4 min read
bottom of page