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विचार


शोर
रात के तीन बज रहे हैं। खिड़की बंद है, कानों में ईयरप्लग्स हैं, फिर भी दीवार के उस पार का कटर एक तीखी, घिसटती आवाज़ में अंदर तक आ रहा है, जैसे लोहा लोहे को काट रहा हो। नींद तो अब भूल ही जाओ। गुस्सा आ रहा है — पर सिर्फ़ उस आदमी पर नहीं जो मशीन चला रहा है। गुस्सा आ रहा है इंसान के लालच की उस हद पर, जहाँ वो अपने समाज को, अपने आस-पड़ोस को, अपने आस-पास की हर चीज़ को हाशिए पर रखकर सिर्फ़ पैसे के बारे में सोचता है। तभी तो आधी रात को सारे नियम ताक पर रखकर कोई अपना काम पूरा करने में लग

Vivek
Aug 153 min read


आदर्श बाल विद्यालय समीक्षा - शिक्षा, शिक्षक और हमारा मौन
आधी रात को, जब पूरा वीकेंड एक सीरीज़ देखने में बीत गया... एक अच्छी सीरीज़ आदर्श बाल विद्यालय देखकर जब उठा, तो ख्याल आया शिक्षक, गुरु और हमारे समाज में उनकी ज़रूरत का। शिक्षा, जो वर्तमान में आंदोलन का मुद्दा बनी हुई है... जिसके लिए लाखों बच्चों ने विरोध प्रदर्शन किया... वही शिक्षा, जिसकी बात हमारे देश में बहुत कम होती है और शिक्षक जो हमारे समाज में वैसे हीं कम हैं और उनका सम्मान उनसे भी कहीं ज्यादा कम। कुछ शिक्षक पद पर तो हैं, पर उनका शिक्षा से वास्ता नहीं। और जो सच में अच्छे

Vivek
Jul 264 min read


नाम — हमारी पहचान
कैसा होता अगर हमारे नाम ही न होते? कभी सोचा है ये? शायद समाज में हमारी कोई पहचान भी न होती। "अरे", "सुनो", "ओ" — इन्हीं से काम चल जाता, पर सच बताऊं, इनसे वो बात नहीं बनती जो नाम से बनती है। बचपन में हम अपने सॉफ्ट टॉयज़ तक को नाम दे देते थे, याद है? मैंने तो बड़ा होने के बाद भी नहीं छोड़ा यह आदत — अपने स्कूटर का नाम रखा था "बसंती", शोले से प्रभावित होकर। बेवकूफी लगती है सोचकर, पर सच में — बिना नाम लिए दस-दस किक मरवाती थी, पूरे मोहल्ले के सामने झुक-झुककर पसीना बहाना पड़ता था। औ

Vivek
Jul 112 min read


सुख और सुकून के बीच
बैठे-बैठे दोपहर यूँ ही गुज़र रही है। विविध भारती में गाने, मनचाहे गीत। आशा भोंसले की आवाज़ में "बरसे पुहार", और चिलचिलाती गर्मी में बारिश का इंतज़ार। मन की प्रकृति भी कितनी अजीब है। उसे चाहत सुकून की होती है और तलब सुख की। सुख और सुकून क्या दोनों साथ में हो सकते हैं—समझ नहीं पाया आज तक। सुख शायद प्राप्ति का भाव है और सुकून स्वीकृति का। पता नहीं ऐसा ही है या व्यक्ति के साथ ये भाव भी बदल जाते हैं। क्या सुकून के बाद सुख की इच्छा समाप्त हो जाती है, या सुख में ही सुकून मिल जाता है

Vivek
Jul 61 min read
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